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Showing posts from April, 2012

तरोताज्ज़ा हो जाती हो!!!

यादें कुछ धुंधली  गर्द वाली हो गयी, अब आती ही रहती है बहुत भुलाने के बाद भी, बहुत पुरानी किताब की कहानिया जैसे याद हो  और किताब उठाने पर तरोताज्ज़ा हो जाती हो!!! मैं रेगिस्तान की रातो की हवा हो जाता हूँ सुबह उठकर रात की तासीर भूल जाता हूँ पर ढलती शाम में सब छोडकर आती  हो तुम, हम ढल जाते हैं एक सांचे में मस्त हवा बन के तरोताज्ज़ा हो जाती हो!!! रंग जिंदगी के यादो में धुल गए दो चार बाल जो   बुड्ढा गए हैं आईने में सूरत तो याद है देखने को पर आईने की दरकरार है गर्द उठ जाती है आईने में तू जब नज़र आती है तरोताज्ज़ा हो जाती हो!!! यादें कुछ धुंधली  गर्द वाली हो गयी, अब आती ही रहती है बहुत भुलाने के बाद भी,

गिला क्या करना....

कुछ लोग  चले गए  बिला वजह  उन्हें जाना था गिला क्या करना! कुछ लोगो की इगो हुयी  है बहुत बड़ी रिश्तो से बड़ी रखे अपने पास गिला क्या करना! बहुत दम हमने मनाया उनको किया हमसे जो बना बाकी मर्जी खुदा की गिला क्या करना! जरुरत पे बसर   बुनियाद जिन की  दुआए जोड़ पायेगी  हमे लगता नि फिर भी  चलो दुआ कर ले गिला क्या करना!!!!

था सफ़र में साथ कौन, कौन काबिल रहा.........!!

इश्क और अशक़ में फर्क ये हुआ एक आंख से छलका दूजा दिल में रहा, हर बार टूटा जो घर बनाया मैंने तेरे तसवूर में जाने क्या नक्शा रहा, बहुत दुआयों से बना है तेरा वजूद बाद इतनी बददुआयों के जिन्दा रहा, मैं क्या और मेरी मोहब्बत  क्या है तुच्छ सिलसिला चलता रहा, अरदास है रब्ब से तुझे पाने की ख्वाब है बेवजह पलता रहा, रात बड़ी भारी रही तेरे ख्यालो की सुबह का चेहरा जाने कहाँ छुपा रहा, बाद इतने इंतजार के मिले तो क्या जब मिलने का ज़रा जी न रहा, वो तेरी वादा खिलाफी नहीं तो क्या है शबाब पूरा पर फिर भी प्यासा रहा, जिंदगी की पिक्चर लम्बी बहुत है हुयी पूरी जिंदगी अंत बाकी रहा, ये हिसाब तुम लगाकर क्यों रो दिए था सफ़र में साथ कौन, कौन काबिल रहा!!