अन्ना गाँधी नहीं हैं..पर जनता की मजबूरी है....
एक मैं ही नहीं सभी के दिल में ये विचार है और सवाल भी की जनता अन्ना के पीछे क्यों? हर गली हर नुक्कड़ पर अन्ना है और दिन ब दिन बढ़ते जा रहे हैं, तो क्या केवल अन्ना का उपवास इसका एकमात्र कारण है या कही दुसरे ढेर सारे कारण एकत्र हो कर जनता को एक तरफ कर रहे है / ये तो आजकल केंद्र में बैठी हुई सरकार के बहुत सारे मंथन/ चिंतन कर्ता सोच रहे होंगे, लगातार दिन रात, इस मुशीबत से निजात पाने की कोशिश भी कर रहे होंगे, तो उन्हें क्या मिला? जवाब खुद जनता ही है/ देखिये अन्ना गाँधी नहीं हैं न थे न होंगे, हां कुछ अपनाये जाने वाले रास्ते गाँधी वादी हो सकते हैं/ यहाँ सवाल ये उठता है की केवल गाँधी वादी होने से जनता समर्थन करती है या कारण को समर्थन मिलता है/ यहाँ पर समर्थन कारण को मिल रहा...