जितना लिखा नहीं होता लोगो की लकीरों में
कुछ लोग बाँट देते हैं उतना फकीरों में।
उसके घर से कोई खाली नहीं जाता
हालांकि शामिल नहीं है वो पैगम्बर पीरों में।
सब तो बेईमान नहीं निकलेंगे
कुछ लोग तो होंगे शरीफ भी अमीरों में।
ताजमहल की नीवं खुदवाओ तुम
देखना हो जो मजदूर कितने दबे जागीरों में।
जमीनें बेचकर ख़रीदे घर पक्के जिन्होंने
उनकी धुप बारिशें खो गयी तअमीरों में। (इमारतें )
खुद खामोश रहता है वो चित्रकार
पर बहुत सच बोलता है तस्वीरों में।
ये सियासतों के खेल बंद भी करो
बहुत लाल दे दिये मांओं ने कश्मीरों में।
उड़ना हमने बेटियों को सिखाया ही नहीं
शर्म, इज्जत, पगड़ी बाँध रखा कितनी जंजीरों में।
छोडो कलेक्टर डॉक्टर, परेशान ना करो
ये छोटे बच्चे हैं टंग ना जाएं तस्वीरों में।
बड़े होकर चले जाते हैं बच्चे रोटी कमाने
मेहमान बस रह जाते घरों की तकदीरों में।
दिल मत लगाना तुम, वो रुकता कहाँ है
उसकी गिनती है पक्के राहगीरों में।
आशिक़ी से पहले हम भी बहुत हँसते थे
अब गिनती होने लगी जो गंभीरों में।
एक मैं ही हूँ जिसे रिश्ता कायम रखना है
दिखता कुछ भी नहीं तुम्हारी तदबीरों में।
जिनको चाहो उन्हें जताना पड़ता है
महबूब मिलते नहीं भजन मंजीरों में।
एक मंजिल है जिसे वर्षो से पाना है
रस्ते बदल बदल के शामिल हूँ राहगीरों में।
बीवी कभी पूछे तो यही बोलना
ढूंढकर लाये हैं तुझे लाखों हीरों में।
हाँ में हाँ मिलानी होती है उसकी
लाला खेला नहीं करते उड़ते तीरों में।
मुझसे बचकर रहा करो मेरी जान
एक ज्योतिषी ने बताया , हैं दो शादियां मेरी लकीरों में।
जो तेरी नज़र में बिजलिया कहाँ शमशीरों में
जल जाएँ डटे रहें सब्र कहाँ नये आशिक़ अधीरों में।





