Monday, June 29, 2026

उसे जाना नहीं रुकना है...........


वापसी की टिकट 

नहीं करवायी थी उसने,

जब तुमने पूछा 

जाने का क्या करोगे  

उसने धीरे से कहा 

अभी सोचा नहीं है,

उसे जाना नहीं 

रुकना है।   


तुमने भी

रोकना ही चाहा था  

वो आँखे, कांपते होंठ, घेरती बाहें 

सब यही कह रहे थे, 

पर मन को मजबूत कर 

ह्रदय को समझा कर 

उसने कहा मैं देखूं 

कौनसी बस में टिकट मिलेगी,

इस बात से जुदा 

उसे जाना नहीं 

रुकना है। 


अपरिहार्य 

है जीवन चक्र में मिलना 

जिसे रचा है  

प्रकृति ने,

और वो चाह रहें 

दो किनारों की तरह 

पूरक बन बहते हुए 

ना मिलें,

बस राह दिखाते रहें 

पानी को समंदर से मिलाने की 

अलबत्ता 

उसे जाना नहीं 

रुकना है। 



जैसे वर्षों से 

किसी पहाड़ पर 

जमी हुयी बर्फ 

वहीँ रह जाना चाहती है 

उसे नहीं बहना 

तरल होकर समंदर तक 

ऐसे ही 

जीवन के ठहराव का आलिंगन बन 

उसे जाना नहीं 

रुकना है।


 

 

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