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जीवन कितना सहज है .. .

सुनो जाना तुम्हारे साथ जीवन कितना सहज है जो मन किया कह दिया जो दिल किया सुन लिया, जो सोचा वो भी  जो किया वो भी तुम्हारे चेहरे के भाव सारे कभी पढ़ लिये कभी सुन लिया, सिकन और दर्द पर  बहस कभी की नहीं जीत के हार के  मायने सब बदल गए  कभी आंसू टपके तो नमी हृदय में थी कभी आंखो में डूब गए कभी अनकहा सुन लिया, खुशियां और गम हमारे हुए हम तुम्हारे सारे के सारे हुए कभी फोन देख कर शरारत की माथे की लकीरों को पढ़ लिया ये भी तो तय है  कभी जो कह न सके वो प्रेम था बाकी सब सुन लिया, हाथों की गर्मी हमारी है गले लग के सुकून की तारी है  तुम्हारे पास होने से दूर हर बीमारी है तुम्हारे साथ जीवन कितना सहज है जो मन किया कह दिया जो दिल किया सुन लिया ।

पुछ लो .......

पुछ लो  तुम हाथो को थामकर  तुम्हे कोइ तकलीफ तो नहीं  तबीयत ठीक है न  तुम सब काम कर तो रहे हो  परन्तु अपना ध्यान भी रख रहे हो क्या  तुम्हारे चेहरे पर कभी कभी जो सवाल उभर आते हैं  उनके  उत्तर हैं क्या तुम्हारे पास कोई सवाल  बहुत वक़्त से अनुतरित तो नहीं है ना, पुछ लो कि तुम्हे  हंसते खिलखिलाते देखने की आदत है  कही हंसी के गर्भ में तुमने अपनी सम्वेदना को छुपा तो नहीं लिया है  नित की दौड  धूप में  रसोई और दफ्तर को समेटते हुये कुछ बिखर तो नहीं गया है ना,  पुछ लो  तुम्हारे चेहरे की सलवटें  उम्रदराज ही हैं ना वो नहीं आयी हैं  बच्चो की चिंता से  और शहर में प्रतिदिन की बुरी खबरों से  तुम नहीं टाल रही हो  डोक्टर का अप्पोइंट्मेंट बचा नहीं रही हो  दुध कम लेकर पैसे  पूछ लो कहीं तुम्हारे प्रेम में कुछ कमी तो नहीं उसे कुछ अलहदा तो नहीं चाहिए कहीं घर परिवार, इज्जत, मान सम्मान सब उसने अपने ही कंधे पर तो नहीं उठा रखे क्या वो सब कुर्बानी तो नहीं दे रहे अपने अंदर से प्रेम को कम करते हुए पूछ लो ...