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Showing posts from August, 2015

जान के की नहीं जाती .....

कहीं भी जाऊं बदन से गाँव की खुशबु नहीं जाती ऐसी मिटटी में दफ़न होने की आरज़ू नहीं जाती।  वक़्त के साथ बना लिया है एक और घर लेकिन यादें बचपन वाले घर की दिल से क्यूँ नहीं जाती।  मेरे माथे पे परेशानी की लकीरें पहचान लेते हैं मेरे पिता की देने की आदत हरसू नहीं जाती। वक्ती थपेड़ों ने खंडित किया तोड़ दिया है मकाँ पर इन दीवारों से लोरी की गूँज यूँ नहीं जाती। मन के चोर चेहरे पर खिलते हैं यकीं  मानो मीन कारोबारी के हाथों से कभी बू नहीं जाती। मेरी एक छोटी सी खता पे रूठे हो जो इतने गलतियाँ हो जाती हैं जान के की नहीं जाती। भारत पाकिस्तान हुए हैं हमारे रिश्ते पीढ़ियां चली गयी मगर अकड़ क्यूँ  नहीं जाती।

i want you back

I want you back as you are answer to my prayers, to my wait, while you were here each moment enthralled your dazzling smile, silky hair, luscious lips, mischievous eyes, world's all best weaved in one, blossoming in my heart  I want you back  to cater my heart  you are answer to my prayers to my wait, you were hope, happiness, Path pal of sad and sorrow, it’s a promise I’ll be better person Will never let you down This time I’ll be grown up Dreams will be ours We will achieve them Just come back Forgive all misdeeds O large hearted!  I want you back  to cater my heart  you are answer to my prayers to my wait,

कहानी -रिश्तों में गिले शिकवे ...

'अच्छा सुनो मैंने परसों आगरा जाने का कार्यक्रम बनाया है। तुम दिल्ली से मेरे साथ चलो।  शनिवार और रविवार है सो तुम्हारे ऑफिस से छुट्टी लेने का भी कोई झंझट नहीं है।'   मोहन ने फ़ोन पर बहुत प्यारे लहजे में कहा। अरे ऐसे कैसे बना लिया कार्यक्रम? मैं नहीं आ सकती।  नलिनी की आवाज़ में बड़ी तल्खी थी। बहुत दिन हुए तुमसे मिले तो सोचा मिलना हो जाएगा और मुझे कुछ काम भी आन पडा है आगरा में।  अब चल पड़ो यार ! मेरे लिए बहुत मुश्किल है, तुम्हे काम है तो निपटा के आओ।  मैं नहीं आ सकती। मोहन को पता था कि नलिनी थोडा नाराज़ होगी क्यूंकि बिना उसकी सहमति लिए उसने ये कार्यक्रम निश्चित कर लिया था।  परन्तु उसे विश्वाश भी था कि वो उसे मना लेगा। 'काम इतना जरुरी नहीं था, वो तो घर बैठे बैठे भी हो सकता था। तुमसे मिलना ही जरुरी है। मुझसे क्यूँ मिलना है ? नलिनी ने पूछा। मिलने का कोई मकसद अभी तक नहीं है दिमाग में।  आजा बस कुछ बातें वातें करेंगे। वो तो फ़ोन पर भी हो जाती हैं फिर मिलने का तात्पर्य ? नलिनी ने फिर तल्खी से कहा। तात्पर्य  हम्म !!  घूमना है थोडा जीना है। ...

जिंदगी घर से मकान......

तुम्हारी पुरानी तसवीरें  रखीं हैं इन्हें भी ले जाओ सम्भालते सम्भालते बहुत थकान होने लगी है। कुछ सहेजे हुए पल प्यार के कुछ लम्हे भी रखे हैं इन सब पर हमारे गिले शिकवे लुगदी की तरह चिपके हैं, पर रूठने से जिंदगी जो घर थी कभी मकान होने लगी है।

हो गया ....

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आरोप निरे निराधार लगा रहा है सुना वो हुकूमत के करीब हो गया, खुद पे रहम खा रहा है आजकल किसी के जाने से इतना गरीब हो गया, हंसके बात करने का मतलब ये तो नहीं तुम्हारा कोई सच में रकीब हो गया, खफा भी हैं और बात भी करनी है कहें किसे, कैसा अपना नसीब हो गया, सोचा था पूछेंगे तेरा हाल तुझसे घबरा के हाल हमारा बेतरतीब हो गया,    

तेरा कष्ट मेरा भी....

तेरा कष्ट मेरा भी है तुझे खबर है ना। पल प्रतिपल की जलन ज्वर तपन बिन सूरज के बरसती अग्न सब तकलीफों में थोडा हिस्सा मेरा भी है तुझे खबर है ना। बावजूद इसके दूरी मजबूरी तेरा कहा सच करना जरुरी अस्पतालों सी दुर्गन्ध ह्रदय में बसी पूरी दर्द अनोखे हैं तेरा कष्ट मेरा भी है तुझे खबर है ना।

ओ रे निष्ठुर-10

कितनी प्रार्थनाओं दुआओं इंतज़ार का परिणाम थे , क्यों चले गए तुम आओ फिर से। नाराज़गी हमें भी है फिर तेरी यादें बातें सब ज्यों की त्यों हैं तो हम  ठहरे हैं  क्यों चले गए तुम आओ फिर से। बंजर धरती की ख़ामोशी  बारिश की बूंदो  को समझ आती है ना  हमें कहना नहीं आया  तो क्या  समझे तो, कुछ कह दो  क्यों चले गए तुम आओ फिर से।   या फिर आंच से  जला दो  इस हृदय धरा पर  उगा हुआ प्रेम  तिलिस्मी कहानी सा  कोई पत्थर बना दो  लेकिन जाओ मत  आ जाओ  ओ रे निष्ठुर !!

आँखों वांखो से पिला नहीं...........

आसमां हूँ मैं, तुझे मुझसा कोई मिला नहीं नज़र में है सब पर तुझसे कोई गिला नहीं। नन्ही आस, प्रेम प्यास और माँ का विश्वास सब हूँ बस पायल छनकने का सिलसिला नहीं। या तो मुझको लगा गले नहीं तो मैं लिपट जाऊं सच के जतन कर आँखों वांखो से पिला नहीं। जमीं बन जिंदगी दे मैं आसमां तुझको सींच दूं खुशियाँ बेहिसाब बांटे दर्द की टहनियां हिला नहीं। जो किया,कहा, दिया वो ही तो रहेगा सदा के लिए     हर्फ़ ज़िंदा रहेंगे बस बाकी कुछ अगला पिछला नहीं।