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मशहूर है फकीरों में............

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जितना लिखा नहीं होता लोगो की लकीरों में  कुछ लोग बाँट देते हैं उतना फकीरों में।   उसके घर से कोई खाली नहीं जाता  हालांकि शामिल नहीं है वो पैगम्बर पीरों में।   सब तो बेईमान नहीं निकलेंगे  कुछ लोग तो होंगे शरीफ भी अमीरों में। ताजमहल की नीवं खुदवाओ तुम  देखना हो जो मजदूर कितने दबे जागीरों में।  जमीनें बेचकर ख़रीदे घर पक्के जिन्होंने  उनकी धुप बारिशें खो गयी तअमीरों में।  (इमारतें )   खुद खामोश रहता है वो चित्रकार  पर बहुत सच बोलता है तस्वीरों में।  ये सियासतों के खेल बंद भी करो  बहुत लाल दे दिये मांओं ने कश्मीरों में।   उड़ना हमने बेटियों को सिखाया ही नहीं   शर्म, इज्जत, पगड़ी बाँध रखा कितनी जंजीरों में।  छोडो कलेक्टर डॉक्टर, परेशान ना करो  ये छोटे बच्चे हैं टंग ना जाएं तस्वीरों में।  बड़े होकर चले जाते हैं बच्चे रोटी कमाने  मेहमान बस रह जाते घरों की तकदीरों में।  दिल मत लगाना तुम, वो रुकता कहाँ है   उसकी गिनती है पक्के राहगीरों में।    आशिक़ी से ...