कुछ टेलीफोन नंबर्स हैं...रहेंगे....
बड़ी असमंजस वाली परिस्थिति है ..कुछ टेलीफोन नंबर्स हैं ...जिन्हें अरसा हुया यूज नहीं किया ..अभी भी स्टोर हैं .शायद कभी यूज हों भी नहीं ..कभी कभी डिलीट करने का मन करता है पर हिम्मत नहीं जुटा पाता। स्क्रोल करने लग जाओ तो कुछ तो ऐसे हैं जो अभी भी मुंह जुबानी याद हैं, कुछ अब काम भी नहीं करते। परन्तु समस्या जस की तस है की इन्हें कैसे और किस तरीके से किसी संदूक में बंद कर समंदर में ड़ाला जाये और निजात पाई जाये। मुश्किल लगता है, सच कहूँ तो मेरे लिए नामुमकिन है। क्यूंकि कुछ तो उस जमाने से साथ हैं जब एसटीडी पीसीओ पर बहुत लम्बी लाइन लगा करती थी, एक डेढ़ घंटे के बाद मात्र ये पूछने या कहने की हिम्मत जुटा पाता था कि कल फलां नोट्स वाली कॉपी ले आना। तुमने वो वाले लेक्चर का काम कर लिया क्या ? दो एक मिनट में महीने का सारा बजट गड़बड़ा जाता था और ऊपर से लाइन में लगे लोग भी ऎसी नजरो से देखने लगते थे जैसे की उनके सामने कोई बलात्कारी खडा है ...