देखा है क्या....
तुम्हारे प्यार में कितने रंग हैं ओस की बूँद को सूरज की किरण से आँख लड़ाते देखा है क्या ! तुम्हारी बातें कितनी मीठी हैं उस ओस की बूँद को हरी दूब से लिपटते देखा है क्या ! तुम्हारे प्यार में कितना समर्पण है तेज सी धूप में उस नन्ही बूँद का पानी से हवा होना देखा है क्या ! तुम्हारी बाहों में कितना कुछ अपना सा है शर्माती बूँद का बहते पानी में घुल एक होना देखा है क्या ! तुम्हारी यादें कितनी अविरल हैं बूँद का हर सुबह कली के साए में छुपकर आना देखा है क्या ! तुम्हारी हंसी तुम्हारी यादें तुम्हारी बाहें तुम्हारे बातें कितना तडपाती हैं उस बूँद को होंठो से छुआकर जालिम देखा है क्या !!