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Showing posts from June, 2011

पहले जैसा कहाँ

जो बह  रहा,  हवा का  झौंका  है  की  क्या  है न मुझको पता है न कोई गुमाँ है, कैसे निकला है सूरज ये अंगड़ाई लेके फिर क्यों उदासी का ये सिलसिला है, जाने कहाँ से इठलाती  बहार आ गयी है पर जो आँखों से बह रहा है वो क्या है, कब से तुम जा चुके हो यहाँ से   हर एक आहट पे दिल क्यों जवाँ है , कैसे कह दू की तुम लौट आओ सब कुछ  यहाँ पहले जैसा कहाँ है

In The Journey of life....

 To live the life leaving all the joy riding at the wave of fate becoming a man from the boy, We have forgotten some of the people who were staying at our hearts for all day and night, Some of them were all ours at the sight of their angels start singing and life filled with cheer, Some of them were colourful gems at one moment of time our passion emotion feelings all were together weaven, We enjoyed with them the first ride first rain first kiss first hug whom we hold for hours, We have/are forgetting someone so special who was so close to our heart at one point of time in the journey of life. mailto:Copyright@%20Rajesh%20Kumar%20Poonia

जाने से पहले !

जाने से पहले एक बार कहा तो होता की इस बार तुम्हारा इरादा वापिस आने का नहीं है जाने से पहले एक बार तुमने याद किया होता उन सभी लम्हों को जो गैर इरादात्तन हमने साथ गुजारे जाने से पहले तुमने पूछा तो होता की बिन तुम्हारे जीना कैसा होगा सदियों सा इंतजार तुम्हारे आने की आस बिन बुझी प्यास जाने से पहले कुछ तो कहा होता कुछ तो सुना  होता निष्ठुर!

गलियों में बेवजह

एक बार  मिले थे तुमसे हम जिस जगह घुमाते रहे जिंदगी भर उन गलियों में बे वजह, उस गली के पथरों  से भी अब गुफ्तगू है कम नहीं  राह तेरी मदीने से किसी तरह , तुमने न मिलने की कसम खाई तो हमें इत्तला हो टूटे न तुम्हारी कसम जान गवाने की ज़रा सी वजह, अब प्यार भी मुश्किल हुआ रब्बा मेरे किस तरह खुदा माना तुम्हे और अरदास की हर जगह, सुना था तू खवाबो को हकीक़त बनाता है फिर हकीक़त  को खवाब में ढाला किस तरह, एक बार मिले थे तुम हमसे जिस जगह  घुमते रहे  जिंदगी भर उन गलियों में बेवजह