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Showing posts from May, 2014

लकीरें बदल सी गयी.........

दिल को  यकीं था तुम मेरे हो लगा जिंदगी सफल सी गयी जाने कैसे गए हो तुम दूर हमसे हाथो की लकीरें बदल सी गयी। हजार बार लिख हर्फ़ मिटाता हूँ तेरे साथ जिन्दगी से ग़ज़ल सी गयी। उम्मीदें यूं ओझल हुयी मेरे साथी समंदर किनारे के महल सी गयी। अब राख समेटूं या की घर बचाऊं खंजर लगा जिंदगी दहल सी गयी। कहते थे लोग सम्भलना इश्क में समझे जब दर से आँख सजल सी गयी।   अब क्या कहें  क्या सुने दोस्तों की नज़र आतें हैं कि तबीयत बहल सी गयी।  

जागे होंगे बाबा

ज्वर तपते नन्हे को देखकर लगा मुझे तुम भी तो मेरी तरह जागे होंगे बाबा , आँखों में सुलगती चिंता,मन में प्रबल शंका माथे पानी की पट्टियां कहाँ कहाँ भागे होंगे बाबा, नन्ही सी जान अटके होंगे खुद के प्राण मन में राम सब इष्टो से वरदां मांगे होंगे बाबा, ज्वर तपते नन्हे को देखकर लगा मुझे तुम भी तो मेरी तरह जागे होंगे बाबा ,

तुम्हारे प्यार के लैटर पैड..........

स्याहियां सुख गयी हैं कुछ चेहरे मुरझाये हैं तुम्हारे प्यार के लैटर पैड बहुत अलसाये हैं । तुम खुश अपने घर में मैं खुश अपने घर में तडपाते हैं जो वो तेरी यादों के सरमाये हैं। जाने कब बादल बरसेंगे जाने तुम कब आओ धरती,पीपल,वो चिरैया और मैं सब घबराये हैं। मुंडेर पर चढ़ के देखूं कभी निहारूं आसमां को तुम हो या मौसमों ने साजिशों के तीर चलाये हैं। प्यार के वो सारे लैटर पैड खाली हैं मेरे प्रिय  बेबसी में जिन पर तेरा नाम नहीं लिख पाये हैं। बहुत दूर नहीं है तेरा घर और वो महफिलें  मगर क़दमों ने तेरी राह तकते होंसले गंवाए हैं। स्याहियां सुख गयी हैं कुछ चेहरे मुरझाये हैं तुम्हारे प्यार के लैटर पैड बहुत अलसाये हैं ।