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Showing posts from April, 2014

तेरी गुलाबी गुलाबी बातें पिया...........

याद आती हैं तेरी गुलाबी गुलाबी बातें पिया कटती नहीं हैं अब ये लम्बी लम्बी रातें पिया। है तन भीगा भीगा और मन भारी भारी जो तुम होते तो कुछ सुनते सुनाते पिया. याद आतीं है तेरी गुलाबी गुलाबी बातें पिया। गर तुम्हे ऊँचे महलों की चाहत न होती हम भी प्रेम गीत कोई मधुर सा गाते पिया याद आतीं है तेरी गुलाबी गुलाबी बातें पिया। तुम दिन की रोशनी में तुम हर  रैना चांदनी में ऐसे जैसे जाने कैसे कैसे तुम्हे पूरी रैना जगाते पिया याद आतीं है तेरी गुलाबी गुलाबी बातें पिया। कभी तुम रूठ जाते तो हम मनाते पिया अपनी जिंदगी को यूँ ना सताते पिया गए छोड़कर भरी राह यूँ ना जाते पिया हम तेरे अपने हैं अपनों को नहीं रुलाते पिया आ जाओ की यूँ ना सताते पिया याद आतीं है तेरी गुलाबी गुलाबी बातें पिया। 

अच्छी यादों का ये रसूल हुआ करता है......

मुहब्बत का ये उसूल हुआ करता है कोसों दूरी का गम कबूल हआ करता है। तेरी तस्वीरों में जान ढूंढ लेते हैं अच्छी यादों का ये रसूल हुआ करता है। आज नहीं तो कल तुमने आना है न मिलने का डर फिजूल हुआ करता है। तुम अब भी चमकते हो चांदनी से देखेगा वो जो तुझमें मशगूल हुआ करता है। रेगिस्तां पर्वत समंदर हैं हमारे दरम्यान दिलों में प्यार न हो तो तगाफुल हुआ करता है। मेरी बातों का बुरा न मान मेरे हमसफ़र हूँ प्यार में तो सब उल-जुलूल हुआ करता है। तुम मेरी रगों में और मैं तेरे प्राण में ये है मुहब्बत इसमें सब मश्मूल हुआ करता है। तेरी तस्वीरों में जान ढूंढ लेते हैं अच्छी यादों का ये रसूल हुआ करता है। १.तगाफुल-उपेक्षा/तिरस्कार २.मश्मूल-शामिल