एक मौका तो दो ..........
कैसा बेजान सा खेल है तेरा मेरा कहाँ मेल है। हर दुआ में तुम हो ह्रदय का अजब खेल है। कसूरवार हूँ मैं प्रिय जिंदगी धक्कम -पेल है। भूलने का हर प्रयत्न अब तक तो फेल है। बिन मिले चल रही ये जिंदगी की रेल है। एक मौका तो दो तुम बिन जिंदगी जेल है।