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Showing posts from July, 2013

सब बेगाने हो गए.....

वो सब लोग बेगाने हो गए जिनके हम दीवाने हो गए। परम्परा जिन्होंने निभाई नहीं बर्बाद वो घराने हो गए। हम ही तेरी यादों में जलें क्यों न मिलने के रोज़ जो बहाने हो गए। तू कह भी तो लौट के न आयेगा  उस इन्सां को मरे जमाने हो गये। तेरा दर तेरी गलियां खुदा का घर इश्क में सब मेरे ठिकाने हो गये। अब जाल में न फसेंगें ये परिंदे जमाने की ठोकरों से जो सयाने हो गए। हुआ नहीं आगाज़ भी इश्क का और हरसू तेरे मेरे फ़साने हो गए।

पड़ोसी सवाल करते होंगे....

घर जा रहे हो तो कुछ ले लो बच्चे  इंतजार करते होंगे। गुलाबों ने फिजा लाल कर दी कहीं दो दिल प्यार करते होंगे। सब सवालों के उत्तर मिल गए नज़रो के तीर कमाल करते होंगे। बड़े दिनों से घर आयी नहीं बेटी माँ बाप से पड़ोसी सवाल करते होंगे। छूटे पीछे जो जमाने की लूट में हाथ मलते हुए मलाल करते होंगे। लोहे के थे पर बर्फ से पिघल गए जलवे तेरे हाल बेहाल करते होंगे।

रोते लोगों को हंसी दीजिये...

कुछ इस तरह ख़ुशी दीजिये रोते लोगों को हंसी दीजिये। तन और मन को जुदा क्यों प्यार में सब का सब दीजिये। वादा जब कर दिया किसी से अब दिल से उसे निभा दीजिये। बहुत करवाई मनमानी तुम्हे माँ बाप को न अब सजा दीजिये। कंजूसी इतनी नहीं अच्छी कहीं तो किसी को कुछ दीजिये। वर्षों से बहा दरिया में पानी न छेड़ो, बस पाप बहा दीजिये। तुम न दोगे तो खुद बनाएगा पानी है इसको रास्ता दीजिये।