सब बेगाने हो गए.....
वो सब लोग बेगाने हो गए जिनके हम दीवाने हो गए। परम्परा जिन्होंने निभाई नहीं बर्बाद वो घराने हो गए। हम ही तेरी यादों में जलें क्यों न मिलने के रोज़ जो बहाने हो गए। तू कह भी तो लौट के न आयेगा उस इन्सां को मरे जमाने हो गये। तेरा दर तेरी गलियां खुदा का घर इश्क में सब मेरे ठिकाने हो गये। अब जाल में न फसेंगें ये परिंदे जमाने की ठोकरों से जो सयाने हो गए। हुआ नहीं आगाज़ भी इश्क का और हरसू तेरे मेरे फ़साने हो गए।