पहली बार जब निशा उस से मिलने आई तो लगा कि एक बहुत ही सौम्य रिश्ते का प्रारम्भ है। बहुत गद-गद भाव से दिवाकर निशा को लेने पहुंचा था। सब बहुत सुखद था। दिवाकर बहुत वर्षो से जिंदगी में इतना व्यस्त रहता आया है कि उसके पास नए रिश्ते, दोस्त और लोगो के लिए वक़्त था ही नहीं। कला और ज्ञान का हमेशा से कायल रहने वाला दिवाकर निशा को कब पसंद करने लगा था उसे भी नहीं पता चला। बुद्धिमता हमेशा उसे लुभाती रही है। कला का सम्मान उसके दिल में कब से पलता है ठीक ठाक से अंदाजा उसे भी नहीं है। हर वो व्यक्ति जो विश्व की सुंदरता को निखारता है उसमे बढ़ोतरी करने का काम करता है उसे पसंद था। क्षेत्र कोई भी हो विज्ञान, कला, लेखन, चित्रकारिता. . . . जो भी हो. . . . उसके दिल को जो चीज अच्छी लगी उसने उसी के अध्ययन में, देखने में, उसे सोचने में जानने में कितना वक़्त बिताया है। कितनी ही किताबें पढ़ते हुए लेखक को प्यार हुआ है और चित्र देखते हुए चित्रकार को पसंद करने लगा था। कैसे य...