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Showing posts from December, 2014

हूँ किसान मैं.....

मेरा अपना कुछ भी नहीं है मैं तो दूसरों के गीत गा रहा हूँ। बड़े जतन से जमीं खोदी संवारी है अब बारिशों बादलों को मना रहा हूँ। खुद भुखा हूँ आंसू है आँखों में जमाने को फिर भी खिला रहा हूँ। कितने कर्ज चढ़े हैं सर पे भारी अब जान देकर उनको चूका रहा हूँ। अंधे का कटोरा और एक भ्रम पत्थर रखे हैं अंदर खनका रहा हूँ। खुद हूँ की नहीं यकीं है नहीं फिर भी खुद को तुझपे लूटा रहा हूँ। एक खाली रास्ता रेगिस्तां जिंदगी उम्मीद के बल चला जा रहा हूँ।

इश्क आशिकी बातें ......

ग़मगीन चेहरों को भुलाया जाये खुद को हौंसला दिलाया जाये, हो गए हो जो अकेले बहुत दोस्तों से मिल आया जाये, रुलाते रहे जो लोग उम्र भर उन से पीछा छुड़ाया जाये, रुआंसी हो रही दुनिया सारी फ़िज़ा में हंसी को मिलाया जाये, सब बदलने का दंभ न भरो है हुनर तो दिखलाया जाये , मिलेगा जो तेरे नसीब में है क्यों बेवजह दिल जलाया जाये, तुमसे जीना मरना वादे कसमें क्यूँ वक़्त इनमें ज़ाया जाये, जमाने के कहने सुनने पे न जा इश्क है तो बाहों को फैलाया जाये, इश्क आशिकी बातें बहुत हुई अब हमको गले लगाया जाये, मन उपजी अग्न को उकसाया जाये प्यास है तो फिर उसे मिटाया जाये।