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ओ जानां

 सुनो हम तुम्हे छेड़ना चाहते हैं किसी वॉयलिन की तार सा, छूते ही जिसे जैसे होती है झन्न एक अंगुली का नन्हा सा पौर और वैसे ही कंपकंपाते से तुम  हर अंग से फूटती  एक अनसुनी सी धुन, इन्ही मचलते रागों में  जी लेना कुछ लम्हे साथ पहाड़ हमें सुनने लग जाएंगे समंदर रोक लेगा सांसे रेगिस्तान होंगे रास्ते मिट्टी नवाजेगी आशिषों से और मेरे हाथ  सफर पर होंगे  ख्वाहिशों की मंजिल पाने को हर तार हर लय  को छेड़ते से  तुम इठलाते से देते रहना मीठी सी तान ओ जानां ।

एक ठिकाना बना लो तुम

जो तुमने कहा है वो हमने कोई माना नहीं है  बस बात इतनी सी है और कोई फसाना नहीं है। बला की हसीन हो कोई बाहों में ना भरना चाहे बचपन से पता है इतना शरीफ कोई ज़माना नहीं है । तुम्हारा अंदाजे इश्क जुदा है हमसे कितना फैसले सुनाते हो गुफ्तगू का कोई तराना नहीं है । हमने दिल खोल के रख दिया है कितनी दफे तुम अब तलक बंद हो, तुम्हे कोई जताना नहीं है । प्यार में समर्पण, बेबाकियां, अकीदत, इबादत आते आते आयेंगे प ल   में बना कोई दीवाना नहीं है । नित लगा रहे हो चक्कर रकीबों की गलियों के दिल में बसा बैठे हैं और तुम्हारा कोई ठिकाना नहीं है। मोहब्बत है तो लौट आओ तुम मेरी सदा पर मर जायेंगे हम, जीने का कोई बहाना नहीं है ।