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राजभाषा में कविता ( RajBhasha Kavi Samelan )

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आँख का कोना रात में जगता है....

इस महीने तनख्वाह आएगी क्या हमें PRC मिल जायेगी क्या अभी अभी तो घर लिया है लोन की किश्त जायेगी क्या? आँख का कोना रात में जगता है सच कहूं डर तो लगता है....... bsnl 4G लाएगी क्या लोगों से compete कर पाएगी क्या राजस्व दिन-ब-दिन घट रहा survive कर पाएगी क्या ? आँख का कोना रात में जगता है सच कहूं डर तो लगता है....... यूँही बंजर बन जायेगी क्या या फिर हरी भरी लहलहाएगी क्या लाखों लोगों के पेट जुड़े हैं सब के भर पाएगी क्या ? आँख का कोना रात में जगता है अपना कोई जैसे ठगता है सच कहूं डर तो लगता है.......