थोडा दूर अब हुआ जाए
उस तक बस मेरी दुआ जाए।
दिल के रास्ते बंद ही तो थे
क्योँ गिला उससे रखा जाए।
कब की है दिल्ली ने वफ़ा
याद उसकी फिर भी रुला जाए।
चल सबक ले अब तो यारा
विश्वास कब कहाँ किया जाए।
धरा की आस पे कब बरसे बादल
जिसको जाना है चला जाए।
आते नहीं थे गम के गीत मुझे
लिखा गुनगुनाया सिखा जाए।
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