Saturday, February 15, 2014

अच्छा ! ये बात चल पड़ी है......

अच्छा ! ये बात चल पड़ी है
पत्थर उठाये दुनिया खड़ी  है , 

बुजुर्ग होकर गालियां बक गए 
अक्ल उनकी घुटनों में जड़ी है,

हर आंसू का हिसाब मांगूंगा  
ज़िद मेरी भी उसी जगह अड़ी है,

आओ मुझे ही जम कर मारो 
कलयुगी निगाहें बदले पे गड़ी हैं,

तोहमते सारी तुमने लगा दी 
झूठ कि रंगत पर इस पे चढ़ी हैं,

एक दिन चला जाउंगा बहुत दूर 
खबर पक्की है न कि यूँही उड़ी है…… !!!



2 comments:

  1. Below ones were great ! This doesnot meet the bar! Expecting a better job next time!

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    1. which ones have raised the bar !!....kindly mention ....

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