Sunday, August 4, 2013

जाग लेता हूँ.....

कशमकश
में रात भर
जाग लेता हूँ,
जाने कहीं
उसे
प्यार आ जाये
खुदा से
हर वक़्त
मांग लेता हूँ।

मिट्टी बन
उसके
हाथो में हूँ
महल बना
घड़ा बना
रेत सा उड़ा
सीने से लगा
जाना कहाँ
हर वक़्त
हर जगह से
उसकी ओर
भाग लेता हूँ।

मुखौटों का
जहां उसका
रंगों की
सारी बातें
इश्क और
अश्क
के दरमयां
जो कटी रातें
हर मुखौटा
फेंक कर
सच की
आग लेता हूँ।

कशमकश
में रात भर
जाग लेता हूँ।
 






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