इन नर्म सर्द हवाओ में
जो बह रहा है,
है किसी गरीब का आंसू
न चाह कर भी आँख में रह रहा है,
सपने संजोये
कुछ काटे
कुछ बोये
अधूरे से खाव्बो की खातिर
न जाने हम कितने रोये,
हर दिन टूटे उसके ये ख़्वाब
अरे सुनो तो जरा
ख्वाबो का टूटना कुछ कह रहा है,
गरीब का आँसू
न चाह कर भी आँख में रह रहा है,
रात भर जो चाँद को देखा उसने
सनसनाती सर्दी में
छुप गया शर्मिंदगी से
बादलों में,
पता है उसे की सुबह संग पसीने के
मेहनत जीतेगी और वो हारेगा
देखो यही वो बादलों से कह रहा है
है गरीब का आंसू
न चाह कर भी आँख में रह रहा है,
जो बह रहा है,
है किसी गरीब का आंसू
न चाह कर भी आँख में रह रहा है,
सपने संजोये
कुछ काटे
कुछ बोये
अधूरे से खाव्बो की खातिर
न जाने हम कितने रोये,
हर दिन टूटे उसके ये ख़्वाब
अरे सुनो तो जरा
ख्वाबो का टूटना कुछ कह रहा है,
गरीब का आँसू
न चाह कर भी आँख में रह रहा है,
रात भर जो चाँद को देखा उसने
सनसनाती सर्दी में
छुप गया शर्मिंदगी से
बादलों में,
पता है उसे की सुबह संग पसीने के
मेहनत जीतेगी और वो हारेगा
देखो यही वो बादलों से कह रहा है
है गरीब का आंसू
न चाह कर भी आँख में रह रहा है,
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