मिले आज इतने अरसे बाद जो
जाने क्यों अपने से लगे वो,
यु तो था जहाँ में कोई है
पर पता न था होगा अपना वो/
इशक की नादानियो से डरने लगे,
यु तो गुफ्तगू बराबर उनसे, पर होगा क्या
दिल की शैतानियों से डरने लगे/
अब क्या कहे और क्या न कहे
काबिले तारीफ है हिम्मत उनकी
कशमकश, को मेरी यूँ आसान कर दिया
तपाक से जो वो गले मिलने लगे /
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