कैसा बेजान सा खेल है
तेरा मेरा कहाँ मेल है।
हर दुआ में तुम हो
ह्रदय का अजब खेल है।
कसूरवार हूँ मैं प्रिय
जिंदगी धक्कम -पेल है।
भूलने का हर प्रयत्न
अब तक तो फेल है।
बिन मिले चल रही
ये जिंदगी की रेल है।
एक मौका तो दो
तुम बिन जिंदगी जेल है।
तेरा मेरा कहाँ मेल है।
हर दुआ में तुम हो
ह्रदय का अजब खेल है।
कसूरवार हूँ मैं प्रिय
जिंदगी धक्कम -पेल है।
भूलने का हर प्रयत्न
अब तक तो फेल है।
बिन मिले चल रही
ये जिंदगी की रेल है।
एक मौका तो दो
तुम बिन जिंदगी जेल है।
No comments:
Post a Comment