Wednesday, April 11, 2012

था सफ़र में साथ कौन, कौन काबिल रहा.........!!

इश्क और अशक़ में फर्क ये हुआ
एक आंख से छलका दूजा दिल में रहा,

हर बार टूटा जो घर बनाया मैंने
तेरे तसवूर में जाने क्या नक्शा रहा,

बहुत दुआयों से बना है तेरा वजूद
बाद इतनी बददुआयों के जिन्दा रहा,

मैं क्या और मेरी मोहब्बत  क्या
है तुच्छ सिलसिला चलता रहा,

अरदास है रब्ब से तुझे पाने की
ख्वाब है बेवजह पलता रहा,

रात बड़ी भारी रही तेरे ख्यालो की
सुबह का चेहरा जाने कहाँ छुपा रहा,

बाद इतने इंतजार के मिले तो क्या
जब मिलने का ज़रा जी न रहा,

वो तेरी वादा खिलाफी नहीं तो क्या है
शबाब पूरा पर फिर भी प्यासा रहा,

जिंदगी की पिक्चर लम्बी बहुत है
हुयी पूरी जिंदगी अंत बाकी रहा,

ये हिसाब तुम लगाकर क्यों रो दिए
था सफ़र में साथ कौन, कौन काबिल रहा!!














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